राष्ट्रीय अध्यक्ष: राजा परिक्षित बिंद जी, जमानिया, गाजीपुर
हम भारतीय हैं, हम बिंद, निषाद, केवट, मल्लाह समाज परिवार वाले हैं। हम वीर एकलव्य के वंशज हैं, हम वीरांगना फूलन देवी के वंशज हैं, जिसके साथ अन्याय हुआ, लेकिन उन्होंने घुटने नहीं टेके, अत्याचारियों का संहार किया। उन देवी के वंशज हैं।
हमारा समाज अंग्रेजों के जमाने में अंग्रेजों को भगाने के लिए सबसे पहले लड़ने वाला समाज है। भारत की आजादी में हमारे पूर्वजों ने खून की होली खेली।
यह एक शक्तिशाली और परिश्रमी (मेहनती) समाज है। जब-जब इस देश में भयंकर बाढ़ आती है, तो सबसे पहले नाव लेकर हर घर को राहत सामग्री पहुँचाने वाला, इंसान, जीव-जंतु, पशु, किसान सबको बचाने वाला यही समाज है।
हम अपने-अपने गांव, गांव जिले जिले, में प्रदेश में बिना स्वार्थ के, निस्वार्थ भाव से सरकार की मदद करते हैं। सरकार का भी फर्ज बनता है कि वो हमारे बारे में सोचे, हमें हक दिलाए। लेकिन सरकार निषाद, केवट, मल्लाह, बिंद समाज को अधिकार नहीं दे रही।
हमारी जनसंख्या भारत में 12 से 14 करोड़ है। हर विधानसभा, हर जिले, हर प्रदेश में है। लेकिन हमारी जनसंख्या को छुपाया जाता है, जबकि ब्राह्मण, क्षत्रिय, राजपूत, यादव, मुस्लिम सबकी जनसंख्या बढ़ा कर दिखाई जाती है। ये बहुत गंभीर मुद्दा है, इससे हमारा समाज पिछड़ता जा रहा है।
PMSP (पिछड़ा मल्लाह समाज परिवार) बिंद, निषाद, केवट, मल्लाह सहित अन्य जातियों (कश्यप, कहार, धीवर, चौधरी बलवंत, खरवार, मांझी आदि) को आरक्षण दिलवाने के लिए बनाया गया है जिनको आज तक आरक्षण नहीं मिला।
17 जातियों को SC आरक्षण तत्काल दिया जाए।
हमारी 14 करोड़ जनसंख्या की सही जातिगत जनगणना हो।
गंगा-जमुना का हम रखवाले हैं। बालू का ठेका, मछली पालन का ठेका, घाट का ठेका, नाव का ठेका और नदी के सभी सरकारी ठेकों में बिंद, निषाद, केवट, मल्लाह समाज को पहले प्राथमिकता और 50% छूट मिले।
बाढ़ में काम करने वाले हर मल्लाह, केवट, निषाद, बिंद समाज को सरकारी गोताखोर, आपदा-मित्र का दर्जा, ₹10 लाख बीमा और मासिक मानदेय मिले।
हमारे समाज पर होने वाले अत्याचार पर SC/ST एक्ट जैसी सुरक्षा मिले।
समाज के लिए सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार, प्रशिक्षण और सम्मानजनक भागीदारी में समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ।
स्थानीय से राष्ट्रीय स्तर तक समाज की उचित भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
साथियों, हम जब दूसरों की रक्षा कर सकते हैं, तो अपने हक और आरक्षण भी सरकार से लड़कर ले सकते हैं।
जय मानव • जय हो मल्लाह समाज